ईमान का पिंजरा या तर्क की उड़ान: क्या धर्म सत्य से डरता है?

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अक्सर हम कहते हैं कि धर्म पर प्रश्न उठना मना है। लेकिन ऐसी कोई सच्चाई क्या हो सकती है जो तर्की के उद्घोषणा पर आधारित न हो? इस वीडियो में इस्लाम के इतिहास और उसकी शिक्षाओं के बारे में कई बातें बताई गई हैं, जिनमें बार-बार छूटने की घटनाएं भी शामिल हैं। यदि एक पैगम्बर को प्रतिष्ठित किया जाता है, तो आज के इंसान को तर्क की आवश्यकता क्यों नहीं है? ‘राजनीतिक नारा’ का मतलब क्या था. हमें यह कहना होगा कि हम अपने बच्चों को विरासत में घृणा और कट्टरता देना चाहते हैं या एक ऐसा समाज चाहते हैं जहां हर इंसान एक दूसरे की जान और माल का सम्मान करे। मजहब के नाम पर होने वाले पाखंड को फायदा ही सच्ची इंसानियत है। हमारा उद्देश्य किसी की आस्था को छूना नहीं है, बल्कि उस ‘सत्य’ की खोज करना है जिसके पीछे इतिहास और राजनीति छिपी है। तर्क शास्त्र और विज्ञान ही वे औज़ार हैं जिन्हें हम सनातन की बेटियों को काट सकते हैं

अंधविश्वास की बेड़ियाँ काटें, तर्क की मशाल जलाएँ। आओ मिलकर एक नया और आज़ाद समाज बनाएँ।

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