साथियों, ‘मिशन सत्यशोध’ का कारवां आज एक ऐसे ऐतिहासिक और भौगोलिक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ हमें पारंपरिक मान्यताओं से ऊपर उठकर ठोस सबूतों की कसौटी पर सच को परखना होगा।
इतिहास, जब विज्ञान और तर्क से मिलता है, तो कई अनसुलझे रहस्य सामने आते हैं। आज का हमारा विषय है—असली काबा कहाँ था?
कनाडाई शोधकर्ता डैन गिब्सन (Dan Gibson) और कई अन्य प्रमुख इतिहासकारों के शोध ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसने सदियों पुरानी मान्यताओं को हिला दिया है।
सत्य के पक्ष में ठोस सबूत:
1. किबला की दिशा (Qibla Direction):
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सबूत है। इस्लाम के शुरुआती 100 सालों में बनी मस्जिदों का रुख मक्का की तरफ नहीं है। पुरानी मस्जिदें, जैसे चीन की गुआंगज़ौ मस्जिद और जॉर्डन की क़स्र अल-हल्लाबात, सीधे पेट्रा (जॉर्डन) की ओर इशारा करती हैं। क्या सदियों तक इंजीनियर इतनी बड़ी गलती कर सकते थे?
2. मक्का का भूगोल बनाम कुरान का विवरण:
शुरुआती इस्लामी साहित्य में मक्का के बारे में जो विवरण मिलता है, वह आज के मक्का से मेल नहीं खाता। वहाँ अंगूर के बाग, जैतून (Olive) के पेड़ और घास के मैदानों का ज़िक्र है। मक्का एक बंजर इलाका रहा है, जबकि पेट्रा पहाड़ियों के बीच एक घाटी में बसा शहर था और एक हरा-भरा इलाका था।
3. व्यापारिक मार्ग (Trade Routes):
सातवीं सदी के रोमन और यूनानी नक्शों में मक्का का नाम तक नहीं मिलता। इसके विपरीत, पेट्रा पूरी दुनिया के व्यापार का केंद्र था और व्यापार के काफिले वहीं से गुज़रते थे।
हमारा उद्देश्य:
हम किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं चाहते। हमारा उद्देश्य केवल यह है कि इतिहास को लकीर का फ़कीर बनकर न देखा जाए। सत्य ही ईश्वर है, और सबूतों के आधार पर सच को खोजना ही हमारी असली मंज़िल है।
आइए, सत्य के इस आंदोलन में हमारा साथ दें और तथ्यों को गहराई से समझें।
सादर,
वासिद वास्तविक
‘मिशन सत्यशोध’ (जन्नती फ़िरक़ा संगठन)